नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और (CAB)
Full Form of CAA and CAB
CAA- (Citizenship Amendment Act)
or
CAB-
(Citizenship Amendment Bill)
भारत
की आबादी पर CAA/CAB का प्रभाव?
इस समय भारत के तीन पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31,313 लोग भारत में लंबी अवधि के वीजा पर रह रहे हैं। CAB
से इन्हें तुरंत फायदा होगा। इसमें 25,000 से अधिक हिंदू, 5800 सिख, 55 इसाई, 02
बौद्ध और 02 पारसी नागरिक
शामिल हैं।
NOTE- ये कानून सिर्फ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले शोषित लोगों को भारत
की नागरिकता हासिल करने की राह आसान करता है। भारत के मुस्लिमों या किसी भी धर्म
और समुदाय के लोगों की नागरिकता को इस कानून से खतरा नहीं है। पूर्वोत्तर
के राज्य के लोगों का मानना है कि CAB के बाद इलाके में अवैध प्रवासियों की संख्या बढ़ जाएगी और इससे क्षेत्र की स्थिरता पर खतरा बढ़ेगा।
· क्या है CAA/CAB का बैकग्राउंड?
माह जनवरी वर्ष 2019 में बिल पुराने फॉर्म में पास किया गया था। CAB
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का चुनावी वादा है. गृह मंत्रालय ने वर्ष 2018
में अधिसूचित किया था कि 07 राज्यों के कुछ
जिलों के अधिकारी भारत में रहने वाले पाकिस्तान, अफगानिस्तान
और बांग्लादेश से सताए गए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिए ऑनलाइन
आवेदन स्वीकार कर सकते हैं. केंद्र व राज्य से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के
बाद उन्हें नागरिकता दी जाएगी। इसमें भारत की नागरिकता पाने के लिए 12 साल के बजाय निवास की जगह अब छह साल की अवधि हो जाएगी।
· CAB का प्रस्ताव क्या
है?
नागरिकता संशोधन बिल
नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है।
नागरिकता बिल 1955 के हिसाब से किसी अवैध प्रवासी को भारत की नागरिकता
नहीं दी जा सकती है। अब इस संशोधन से नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में
बदलाव किया गया है।
· CAB के दायरे में कौन-2 आ रहा है?
नागरिकता
बिल में इस संशोधन के बाद मुख्य रूप से 06 जातियों के अवैध प्रवासियों को
फायदा होगा। बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आये हिंदु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए अवैध दस्तावेजों के
बाद भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा। वास्तव में इससे नॉन
मुस्लिम रिफ्यूजी को सबसे ज्यादा लाभ होगा।
· कौन-2 रहेगा इसके दायरे से बाहर?
विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार CAB के माध्यम से मुसलमानों को टार्गेट करना
चाहती है। इसका कारण यह है कि CAB 2019 के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और
बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। विपक्षी
पार्टियां इसी आधार पर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रही हैं। सरकार का तर्क यह
है कि धार्मिक उत्पीड़न की वजह से इन देशों से आने वाले अल्पसंख्यकों को CAB के माध्यम से सुरक्षा दी जा रही है।
· सरकार का क्या तर्क है?
सरकार का कहना है कि साल 1947 में भारत-पाक
का बंटवारा धार्मिक आधार पर हुआ था। इसके बाद भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में कई
धर्म के लोग रह रहे हैं। पाक, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में
धार्मिक अल्पसंख्यक काफी प्रताड़ित किये जाते हैं। अगर वे भारत में शरण लेना चाहते
हैं तो हमें उनकी मदद करने की जरूरत है।
·
CAB का
विरोध कौन और क्यों कर रहा है?
विपक्षी दल CAB का विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि यह भारत के संविधान के Article 14 का उल्लंघन करता है। आर्टिकल 14 समानता के अधिकार से संबंधित है। कांग्रेस, तृणमूल,
सीपीआई (एम) जैसे दल CAB का विरोध कर रहे हैं।
इसके साथ ही देश के पूर्वोत्तर के राज्यों में इस बिल का काफी विरोध किया जा रहा
है।
· किन राज्यों पर CAB का सबसे अधिक असर पड़ेगा?
CAB का सबसे अधिक असर पूर्वोत्तर के 07
राज्यों पर पड़ेगा। भारतीय संविधान की छठीं अनुसूची में आने वाले पूर्वोत्तर भारत
के कई इलाकों को नागरिकता संशोधन विधेयक में छूट दी गई है। छठीं अनूसूची में
पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, त्रिपुरा और
मिज़ोरम आदि शामिल हैं जहां संविधान
के मुताबिक स्वायत्त ज़िला परिषद हैं जो स्थानीय आदिवासियों के अधिकारों की
सुरक्षा सुनिश्चित करती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 में इसका प्रावधान किया गया है। संविधान सभा
ने 1949 में इसके ज़रिए स्वायत्त ज़िला परिषदों का गठन करके
राज्य विधानसभाओं को संबंधित अधिकार प्रदान किए थे। छठीं अनूसूची में इसके अलावा
क्षेत्रीय परिषदों का भी उल्लेख किया गया है। इन सभी का उद्देश्य स्थानीय
आदिवासियों की सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना
है।


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